Sunday, August 21, 2011

मेरा सच

मेरा सच
अजब हुई बसर यह ज़िन्दगी यहाँ,
चेहरों पर नकाब और नकाबों की कथा
भ्रमित दुनिया के बीच में,
मुझ अकेले की कृत्रिम कथा
खोजता हूँ सत्य दुर्लभ ही सही...
मिथ्या मध्य स्थित मैं अकेला यहाँ।
अनेक वर्तायों में सत्य एक,
उस एक सच की झूठी कथा
प्राथमिकता की सीमा पर पाया मैंने,
पात्र प्रथम नाट्य मैत्री...
फिर चंचल सत्य ने भ्रमित करके
प्रदान की एक झूठी ख़ुशी
सच झूठ के चक्रव्यूह में
फँसी दृष्टी से लाचार मैं,
ढूंढता हूँ खुद ही की वास्तविकता का प्रकाश...