कुछ परायी सांसे।
अनजानी धड़कनें,
जी रहा हूँ एक ऐसी हकीकत किसके अस्तित्व पे भरोसा नहीं।
कुछ कोरे पन्नों का हासिल है आज
कुछ सूखे पत्तो का हासिल है आज
खुद ही का दोषी हुआ बैठा लिख रहा हूँ अपनी ही अस्तित्व की दास्ताँ।
उन आसुओं की गलती नहीं
उस मुस्कराहट का दोष नहीं
नसीब है, हकीकत है
पक्के इरादों ने किये कुछ ऐसे वादे
जिनका हिसाब देती है आज ज़िन्दगी
उन इरादों पे हस्ती है, रोती है, मुस्कुराती है ज़िन्दगी।
आज झांकी है पीछे से एक सांस,
पर जल्दी ही खो जायेगी।
अनजानी धड़कनो में पहचानी से एक धड़कन...खो जायेगी।
कुछ ख्वाबो को बदन लेते देखा है।
हकीकत से खेलते देखा है।
पर ख्वाब ख्याब ही होते हैं, हकीकत नहीं
धड़कन मेरी ही है किसी और की नहीं।
Wednesday, August 10, 2016
मेरा असमंजस
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